लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने का देवबंद के मौलवियों ने किया विरोध
संवाददाता/in24 न्यूज़.
मोदी सरकार स्वरा लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने पर प्रसिद्ध इस्लामिक मदरसा दारुल-उलूम देवबंद के मौलवियों ने लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने के केंद्र के फैसले का विरोध किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खापों ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और घोषणा की है कि वे इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक महा पंचायत बुलाएंगे। देवबंद के मौलवियों ने कहा है कि ऐसा लगता है कि फैसला जल्दबाजी में लिया गया है और इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। जमीयत दावत उल मुस्लिमीन के संरक्षक इशाक गोरा ने कहा कि अगर केंद्र सरकार इसे कानून बनाना चाहती है, तो उन्हें सभी धर्मो के धर्मगुरुओं से सलाह लेनी चाहिए थी। मौलवी ने आगे कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां लोग सरकार से ज्यादा धार्मिक प्रमुखों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को कोई भी कानून बनाने का अधिकार है। लेकिन लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के बाद सरकार को इसे लागू करने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। देवबंद के एक अन्य मौलवी मुफ्ती असद कासमी ने कहा, वे (सरकार) किसी की नहीं सुनते। अगर वे इसे कानून बनाना चाहते हैं, तो वे ऐसा करेंगे। लेकिन मैं यह बताना चाहूंगा कि अगर एक लड़का और एक लड़की ने सही समय पर शादी नहीं की, तो जोखिम है कि वे पाप कर सकते हैं। इसलिए, उनकी शादी कम उम्र में कर देनी चाहिए। बता दें कि मुस्लिम औरतों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।