सातवें दौर की वार्ता में भी अपनी मांगों पर अड़े किसान
संवाददाता/in24 न्यूज़.
किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं और साथ ही उनका नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है, जिसमें कोई हल नहीं निकला, लेकिन आज एक बार फिर किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच कृषि कानूनों के मुद्दे पर बातचीत पटरी पर लौटी है। विज्ञान भवन की कई बैठकों में सरकारी लंच ठुकरा कर लंगर का खाना खाने वाले किसान नेताओं का बुधवार को मंत्रियों ने भी साथ दिया। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने विज्ञान भवन के अंदर लाइन में लगकर आम किसान नेताओं की तरह लंगर का खाना खाया। इस दौरान एक किसान नेता ने सेल्फी भी ली। मोदी सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश बातचीत की कमान संभाले हैं। वहीं किसानों की तरफ से विभिन्न संगठनों के 40 नेता मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच इससे पहले पांच दिसंबर को आखिरी बार विज्ञान भवन में बैठक हुई थी। अब तक किसानों और सरकार के बीच हुई सभी वार्ताएं बेनतीजा रहीं। अगले दौर की बैठक 9 दिसंबर को प्रस्तावित थी मगर केंद्र सरकार के प्रस्ताव भेजने की बात पर यह बैठक स्थगित हो गई थी। केंद्र सरकार की ओर से 9 दिसंबर को भेजे संशोधन प्रस्तावों को किसान नेताओं ने खारिज कर दिया था। इसके बाद करीब 22 दिनों बाद आज बुधवार को दोनों पक्ष वार्ता की टेबल पर आए हैं। किसान संगठनों ने आज विज्ञान भवन की मीटिंग में 4 प्रमुख मुद्दे उठाये हैं। इनमें पहला मुद्दा तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने, दूसरा मुद्दा प्रमुख मांग एमएसपी को कानूनी जामा पहनाने और तीसरी मांग एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए बने कानून के तहत एक्शन के दायरे से किसानों को बाहर रखने की है। किसान नेताओं ने सरकार के सामने चौथी मांग के तौर पर विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापस लेने की बात कही है। बता दें कि सरकार लगातार किसानों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कृषि कानून उनके हिट के लिए है और किसानों को लेकर विपक्षी पार्टियां राजनीति कर रही है.