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सियासत के बीच धूम धाम से मनाई गई बकरीद

07 Jun, 2025 131

आज  मुंबई समेत समूचे देश में बकरीद का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। बकरीद को ईद-उल-अजहा, ईद उल जुहा और ईद उल बकरा के नाम से भी जाना जाता है। ये त्योहार त्याग और इंसानियत का प्रतीक माना जाता है। इस्लाम धर्म में इसे फेस्टिवल ऑफ़  सक्रिफाइस यानी 'कुर्बानी का त्योहार' भी कहा जाता है। 

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, हर साल की ईद की तारीख चांद की स्थिति पर आधारित होती है। ज़ुलहिज्जा की 10वीं तारीख को ईद-उल-अजहा मनाई जाती है, जो कि रमजान खत्म के 70 दिन बाद आता है। ईद-उल-अजहा की कहानी हज़रत इब्राहीम से जुड़ी है, जिसमें वे अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे हज़रत इस्माईल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे। लेकिन, खुदा ने उन्हें एक जानवर दे दिया था। इसलिए, इस दिन एक बकरी, भेड़ या अन्य जानवर की कुर्बानी दी जाती है।  

इस कुर्बानी के जरिए यह संदेश दिया जाता है कि अल्लाह की राह में कुछ भी कुर्बान करने का जज्बा रखना चाहिए। ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इस दिन इस्लाम धर्म के लोग किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं. इस्लाम में सिर्फ हलाल के तरीके से कमाए हुए पैसों से ही कुर्बानी जायज मानी जाती है। कुर्बानी का गोश्त अकेले अपने परिवार के लिए नहीं रख सकता है। इसके तीन हिस्से किए जाते हैं। पहला हिस्सा गरीबों के लिए होता है. दूसरा हिस्सा दोस्त और रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा अपने घर के लिए होता है। 

इस्लाम में ऐसे जानवरों की कुर्बानी ही जायज मानी जाती है जो जानवर सेहतमंद होते हैं. अगर जानवर को किसी भी तरह की कोई बीमारी या तकलीफ हो तो अल्लाह ऐसे जानवर की कुर्बानी से राजी नहीं होता है। ईद-उल-अजहा यानी बकरीद सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों, मेलजोल और इंसानियत का भी प्रतीक है।  भारत समेत कई देशों में बकरीद के दिन की शुरुआत ईद की नमाज से होती है। लोग इस दिन नए कपड़े पहनते हैं, एक-दूसरे को 'ईद मुबारक' कहते हैं और तोहफे और मिठाइयां बांटते हैं। साथ ही, ईद के मौके पर गरीबों को दान किया जाता है। 
 

जहां सऊदी अरब एक दिन पहले बकरीद मनाते हैं, वहीं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और मलेशिया में यह त्योहार आमतौर पर एक दिन बाद मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बने ईदगाह में सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंच रहे हैं और अपनी नमाज अदा कर रहे है। वही त्यौहार में किसी प्रकार की सुविधा हो इसके लिए पुलिस और प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 

राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई तक और भोपाल से लेकर लखनऊ तक सुरक्षा के लिए पुलिस की टीमें तैनात है। मस्जिदों के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस बार बकरीद को लेकर काफी तनातनी भी देखने को मिल रही है। 

दरअसल बकरीद में होने वाली कुर्बानी का विरोध हो रहा है। नेताओं और धर्मगुरुओं के बीच बयानों का सिलसिला जारी है। कही तल्ख़ बयानबाजी हो रही है, कहीं चेतावनी दी जा रही है, तो कहीं जुबानी हमले सारी सीमाओं को पार कर रहे हैं। एक तरफ वो लोग है जो कहते है कि कुर्बानी के नाम पर जीव हत्या की जा रही है। तो वही दूसरी तरफ से ये सवाल किया जा रहा है कि अखिर एक ही दिन पशु प्रेम क्यों जागता है। 

उत्तर प्रदेश सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री राजेश्वर सिंह ने तो खुली धमकी तक दे डाली और अब उनके बयान पर बवाल मचा हुआ है। दरअसल मंत्री राजेश्वर सिंह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा  था कि बकरीद आ रही है, इस दौरान मुसलमानों को हम गाय नहीं काटने देंगे। अगर प्रतिबंधित पशु कटेंगे तो मुसलमान भी कटेंगे और कुशीनगर में खून की धारा बह जाए। वहीं एमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि बकरीद का त्यौहार मनाने का अधिकार भारत का संविधान देता है। 

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