गुपकार ग्रुप पर बरसे अमित शाह

 17 Nov 2020  35

संवाददाता/in24 न्यूज़.
गुपकार ग्रुप को लेकर बीजेपी कड़ी आपत्ति दर्ज करवा रही है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुपकार अलायंस पर जोरदार पलटवार किया है। गुपकार अलायंस को 'अपवित्र गठबंधन' करार देते हुए शाह ने कहा कि यह गठजोड़ जम्मू-कश्मीर को आतंक एवं घोटाले के युग में ले जाना चाहता है। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और आगे भी आतंरिक हिस्सा रहेगा। इस गठबंधन को देश की जनता स्वीकार करने नहीं जा रही है। शाह ने कहा कि गुपकार गैंग या तो देश की भावना समझकर काम करे नहीं तो लोग उसे डुबो देंगे। उन्होंने कहा कि यह गैंग अनुच्छेद 370 के जरिए दलितों, महिलाओं एवं आदिवासियों को मिले अधिकारों को छीनना चाहता है और यही कारण है कि लोग इस गठबंधन को हर जगह खारिज कर रहे हैं। गृह मंत्री अनुच्छेद 370 को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया एवं राहुल गांधा से सवाल पूछे हैं। शाह ने लगातार कई ट्वीट कर गुपकार अलायंस पर हमला बोला है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और गुपकार गैंग जम्मू-कश्मीर को आतंक और घोटाले के युग में ले जाना चाहता है। हमने अनुच्छेद 370 हटाकर दलित, महिलाओं और आदिवासियों को जो अधिकार दिए हैं, वे उन अधिकारों को छीनना चाहते हैं। इसी रवैये के कारण लोग उन्हें हर जगह खारिज कर रहे हैं। अपने एक अन्य ट्वीट में गृह मंत्री ने कहा कि गुपगार गैंग वैश्विक हो रहा है। यह गैंग जम्मू-कश्मीर में विदेशी ताकतों का दखल चाहता है। यह गैंग भारतीय तिरंगे का भी अपमान करता है। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या सोनिया जी और राहुल जी गुपकार गैंग की इन बातों का समर्थन करते हैं? सोनिया और राहुल जी को देश के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए? गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और आगे भी रहेगा। राष्ट्रीय हित के खिलाफ किसी भी अपवित्र गठबंधन को देश के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुपकार गैंग देश की भावनाओं के हिसाब से काम करे नहीं तो लोग उसे डुबा देंगे। जम्मू-कश्मीर में इस महीने के अंत में डीडीसी के चुनाव होने हैं। इस चुनाव को लड़ने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी सहित जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों ने गुपकार अलायंस नाम से गठबंधन बनाया है। कांग्रेस भी इस गठबंधन का हिस्सा है। पिछले साल पांच अगस्त को एनसी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के गुपकार रोड स्थित आवास पर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर चर्चा हुई थी। इसके बाद सभी स्थानीय नेता नजरबंद हो गए। नजरबंदी से रिहाई के बाद इन नेताओं ने इसे गुपकार अलायंस नाम दिया है। बीजेपी की तरफ से लगातार यह सवाल किया जा रहा है कि कांग्रेस गुपकार ग्रुप को समर्थन देने के मामले में अपना रुख साफ़ करे.