हिंदी भाषा विवाद पर भड़के आदित्य ठकरे, सिर्फ शिक्षा से नहीं राजनीति से जुड़ा है मुद्दा
संवाददाता/in24 न्यूज़।
महाराष्ट्र में इन दिनों हिंदी भाषा को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है हिंदी भाषा के अनिवार्य किये जाने के फैसले पर पहले मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आपत्ति जताई है तो वही अब हिंदी भाषा को लेकर जारी विवाद पर शिवसेना यूबीटी के विधायक आदित्य ठाकरे भी भड़क उठे हैं। बता दें कि राज्य की महायुति सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए हिंदी को अनिवार्य कर दिया है. यह फैसला खासतौर पर मराठी स्कूलों में लागू किया जा रहा है, जिस से राजनीतिक गलियारे में घमासान मच गया है.शिवसेना यूबीटी के विधायक आदित्य ठाकरे ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा, "बच्चों पर 3 भाषाएं एक साथ लादना गलत है. पहली कक्षा के बच्चों पर मराठी, अंग्रेजी और अब हिंदी, 3 भाषाओं का दबाव डालना उचित नहीं." उनका सुझाव है कि नई भाषा को धीरे-धीरे, क्रमिक रूप से सिखाया जाए, ताकि बच्चों पर बोझ न बढ़े.
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि यह मुद्दा सिर्फ शिक्षा से नहीं, बल्कि राजनीति से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, 'मैं इसे दो स्तर पर देखता हूं, पहले तो राजनीति स्तर पर जिन दो लोगों की बैठक हुई उन दोनों को मराठी और हिंदी की जरूरत है, कोई मराठी का विषय बीएमसी में चलाए तो कोई हिंदी का विषय बिहार के चुनावों में चलाए, सब अपनी रोटी सेंकते रहें और हम आपस में लड़ते रहें। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों पर भी इसका असर पड़ने की बात सामने आई है. पहले से ही प्रशासनिक कार्यों और पढ़ाई का बोझ झेल रहे शिक्षक अब एक और भाषा पढ़ाने की जिम्मेदारी उठाएंगे-