तंत्र मंत्र के लिए मासूम बच्ची की रेप के बाद हत्या
संवाददाता/in24 न्यूज़.
अंधविश्वास आज भी नासूर की तरह इस देश को गर्त में ले जाने का काम कर रहा है. कानपुर में दीवाली की रात एक बहुत ही खौफनाक घटना सामने आई है. यहां 6 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद काला जादू और तंत्र-मंत्र के लिए उसका फेफड़ा निकाल लिया गया. कानपुर के अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण बृजेश श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि इस वारदात के मामले में अंकुल कुरील और बीरन नामक दो आरोपियों को पकड़ा गया. पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को बताया कि बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के बाद उन्होंने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद बच्ची के दोनों फेफड़े निकाल कर अन्य मुख्य आरोपी पुरुषोत्तम को बच्ची के फेफड़े दे दिए थे. आरोपियों ने बताया कि पुरुषोत्तम को काला जादू करने के लिए बच्ची के इन अंगों की जरूरत थी. पुरुषोत्तम को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किया था. उसकी पत्नी को पुलिस ने वारदात में शामिल होने की आशंका के आधार पर हिरासत में लिया है. पुरुषोत्तम ने शुरू में पुलिस को भ्रम में डालने की कोशिश की थी. जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने बाद में सारा सच उगल दिया. पुरुषोत्तम ने बताया कि साल 1999 में उसकी शादी हुई थी, अब तक उसका कोई बच्चा नहीं है. पुलिस के अनुसार, औलाद हासिल करने के लिए पुरुषोत्तम को किसी तांत्रिक ने काला जादू करने की सलाह दी थी. काला जादू के लिए किसी बच्ची के फेफड़ों की जरूरत थी. इस कारण उसने अपने भतीजे अंकुल तथा उसके मित्र बीरन को पड़ोसी की बच्ची अगवा करने के लिए तैयार किया. घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव में रहने वाला एक परिवार दीपावली की पूजा की तैयारी कर रहा था. इस दौरान उनकी छह वर्षीय बेटी गायब हो गई. परिजनों को जब बेटी नहीं मिली तो उसकी तलाश शुरू हुई. दीवाली के अगले दिन सुबह मंदिर के पास से ग्रामीणों ने एक बच्ची का शव देखा. लड़की के शरीर पर लगे चोट से पता चला कि उसकी हत्या धारदार हथियार से की गई. पुलिस ने बताया कि लड़की के हाथ और पैर में रंग लगा था. तंत्र-मंत्र के लिए लड़की की हत्या का मामला सामने आया. डीआईजी ने बताया कि इसकी पुष्टि तथा वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है. दूसरी तरफ सीएम योगी ने बच्ची की हत्या की घटना में अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए. बता दें कि आज भी अंधविश्वास की बलि मासूम ही चढ़ते हैं.