ज़ोमैटो का बड़ा फैसला, महंगी हुई फूड डिलीवरी
ईरान और इजराइल के बीच चल रही जंग का असर आपके खाने-पीने पर पड़ने लगा है। एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल में बढ़ोतरी के बाद निजी कंपनियों ने भी अपने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जोमैटो ने अब प्रति ऑर्डर ली जाने वाली प्लेटफार्म फीस में 2 रुपये 40 पैसे का इजाफा कर दिया है। इसके बाद आपको जोमैटो से खाना मंगाना पड़ेगा।
वहीं, ज़ोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी स्विगी फिलहाल प्रति ऑर्डर 14.99 रुपये (कर सहित) का प्लेटफॉर्म शुल्क ले रही है। आमतौर पर, दोनों कंपनियां एक-दूसरे के अनुरूप अपने शुल्क ढांचे बदलती रहती हैं। साथ ही, फूड डिलीवरी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र होती जा रही है। शहरी परिवहन स्टार्टअप रैपिडो ने हाल ही में बेंगलुरु में 'ओनली' नाम से अपनी फूड डिलीवरी सेवा शुरू की है। कंपनी का दावा है कि वह डिलीवरी शुल्क के अलावा ग्राहकों और रेस्टोरेंट से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, रैपिडो की रणनीति मौजूदा कंपनियों पर दबाव डाल सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ग्राहक पहले से ही विभिन्न अतिरिक्त शुल्कों को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। प्लेटफार्म शुल्कों में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। ईंधन की कीमतों में वृद्धि के साथ, डिलीवरी लागत भी बढ़ती है, जिससे कंपनियों के संचालन पर असर पड़ता है और अंततः इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ता है। इस निर्णय के बाद, प्रत्येक ऑर्डर की कुल लागत बढ़ जाएगी, जिससे ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है। इस बीच, खाद्य वितरण बाजार में प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प होती जा रही है।