भारत-चीन सीमा पर झारखंड के मज़दूर देंगे सेवा
संवाददाता/in24 न्यूज़.
चीन भले ही अपना पड़ोसी देश है, मगर उसने लद्दाख में जो किया उससे उसकी मंशा समझ में आई. अब भारत-चीन सीमा पर झारखंड के मज़दूर अपनी सेवा देंगे. इस संदर्भ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को राज्य के 11,800 से अधिक श्रमिकों को महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भर्ती करने की अनुमति दे दी है. ये मजदूर लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर निर्माण कार्य के लिए बुलाये गए हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के सूत्रों ने कहा कि झारखंड बीआरओ के साथ भविष्य में होने वाली सभी भर्तियों में श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए भी तैयार है. सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि हम अपने श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं और हमारे आदिवासी भाइयों ने लंबे समय तक राष्ट्र की सेवा की है और इसमें अग्रणीय भूमिका निभाई है. हम अपने वर्कर्स को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में भेजने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके सम्मान, कल्याणकारी अधिकारों से किसी भी समझौते की अनुमति नहीं देंगे. बीआरओ द्वारा अनुरोध किए गए 11, 815 श्रमिकों को लद्दाख में ऑपरेशन विजक (लगभग 8,000 श्रमिकों की आवश्यकता), उत्तराखंड में प्रोजेक्ट शिवालिक, हिमाचल प्रदेश में प्रोजेक्ट दीपक, जम्मू-कश्मीर में प्रोजेक्ट बीकन में शामिल किया जायेगा. पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सेना के बीच टकराव के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क परियोजनाएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. रक्षा मंत्रालय के अनुरोध पर गृह मंत्रालय ने 22 मई को रेलवे को श्रमिकों के लिए 11 विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था के लिए लिखा था. लद्दाख में भारत और चीन सीमा पर गतिरोध के बीच चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ एक नई स्थायी सड़क का निर्माण किया है. एक रिपोर्ट के अनुसार यह सड़क भारी परिवहन वाहनों को लेने के लिए डिज़ाइन की गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार ब्लैकटॉप्ड रोड भारत के गोगरा पोस्ट के करीब एलएसी के ठीक सामने बनाई गई है. रिपोर्ट के अनुसार तीन हफ्तों में यह पूरी हुई ये सड़क सिर्फ चार किलोमीटर लंबी है और एक बड़े नेटवर्क से जुड़ती है.