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सुप्रीम कोर्ट ने कहा - तलाक के लिए 6 महीने के लंबे वक्त की जरूरत नहीं

01 May, 2023 935

ब्यूरो रिपोर्ट/in24न्यूज़/दिल्ली

देश की सर्वोच्च न्यायपालिका ने तलाक से जुड़े मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि रिश्तो में सुधार की गुंजाइश नहीं बची हो, तो दंपति को 6 महीने के लंबे इंतजार की आवश्यकता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा कि विवाह में कभी ना सुधरने वाले रिश्ते के आधार पर तलाक देने के लिए सर्वोच्च न्यायपालिका अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त अपरिहार्य शक्तियों का प्रयोग कर सकती है. मौजूदा विवाह कानूनों के मुताबिक पति-पत्नी की सहमति के बावजूद पहले फैमिली कोर्ट एक समय सीमा यानी (6 माह) तक दोनों पक्षों को पुनर्विचार करने का समय देते हैं. अब सुप्रीम कोर्ट की नई व्यवस्था के अनुसार, आपसी सहमति से तलाक के लिए निर्धारित 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि इस अदालत के पास बिना बेड़ियों के पूर्ण न्याय करने की शक्ति है. इस कोर्ट के लिए यह संभव है कि वह कभी ना सुधरने वाले रिश्ते के आधार पर तलाक मुहैया करा दे. दरअसल 29 सितंबर, 2022 को पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस संदर्भ में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ को भेजा गया मुख्य मसला यह था कि क्या हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 ब के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को माफ किया जा सकता है या नहीं. जिस पर अब संविधान पीठ ने अपना फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सात साल पहले इस याचिका को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया था. फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की इस संविधान पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, एएस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ और जेके माहेश्वरी शामिल रहे. सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद अब विवाद के स्वरूप बन रहे पति और पत्नी के रिश्तों को अलग होने के लिए छह महीने लंबे इंतजार की आवश्यकता नहीं होगी.

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