मुंबई में ईद उल फितर की धूम, मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़
ईद-उल-फितर त्योहार पूरे देश में बड़े ही उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। रमजान के पवित्र महीने के समापन पर मुसलमानों ने सुबह की नमाज अदा कर अल्लाह का शुक्र अदा किया और अमन-चैन की दुआ मांगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य शहरों में मस्जिद में बड़ी संख्या में लोगों ने ईद की नमाज अदा की। समाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।
दिल्ली, मुंबई, श्रीनगर से लेकर कोलकाता तक इस त्योहार पर खास रौनक देखने को मिल रही है। नमाज के बाद बच्चे खुले मैदानों में खेलते नजर आए। उनके चेहरों की खुशी इस बात का संकेत थी कि ईद सिर्फ इबादत का ही नहीं बल्कि खुशियों का भी त्योहार है। नमाज पूरी होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर और हाथ मिलाकर बधाई दी। इस दौरान भाईचारे और सौहार्द का खूबसूरत नजारा देखने को मिला।
देश के कई हिस्सों में ईद की नमाज के लिए खास इंतजाम किए गए थे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य शहरों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए। वहीं मुंबई के विभिन्न इलाकों में लोग नमाज अदा करने के बाद एक-दूसरे को बधाई देते नजर आए। ईद-उल-फितर न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि ये समाज में प्रेम, एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का भी अवसर होता है।
रमजान के महीने में रखे गए रोजों के बाद ये त्योहार लोगों के लिए खुशी और राहत का संदेश लेकर आता है। ये हमें जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में समानता बनाए रखने की सीख देता है। ईद उल फितर इस्लाम धर्म का बहुत ही पवित्र और खुशियों वाला त्योहार है, जो रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है। त्योहार नए चांद यानी शव्वाल महीने की शुरुआत के दिखने पर मनाया जाता है।
ईद का मतलब होता है खुशी और उल-फितर का मतलब है रोजा खोलना। इस दिन लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें रोजे रखने की ताकत दी। इस्लामी कैलेंडर में दो बड़ी ईद मनाई जाती हैं। पहली ईद-उल-फितर, जो रमजान के अंत में आती है, दूसरी ईद-उल-अजहा होती है, जो इस्लामी साल के आखिरी महीने जिलहिज्जा की 10, 11 और 12 तारीख को मनाई जाती है।
वहीं पटना के गांधी मैदान में आज हजारों लोगों ने एक साथ ईद की नमाज अदा की, लेकिन इस बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 30 दिन के रोजे के बाद ईद की नमाज अदा की गई। इस दौरान जदयू नेता और सीएम के बेटे निशांत कुमार नमाजियों के बीच पहुंचे और लोगों से मुलाकात की। ईद का दिन मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास होता है। यह दिन जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति और सहायता का संदेश भी देता है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक अनिवार्य दान है, जो साहिब-ए-निसाब यानी निर्धारित संपत्ति वाले मुसलमानों द्वारा वर्ष में एक बार अपनी कुल संपत्ति का गरीबों को दिया जाता है।