आरक्षण बढ़ाने के साथ-साथ सभी गरीबों को आर्थिक मदद का सीएम नीतीश कुमार ने दिया प्रस्ताव
संवाददाता/in24 न्यूज़।
बिहार की जातीय जनगणना के बाद आरक्षण प्रतिशत बढ़ाए जाने की मांग उठ रही थी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उसी बात को आगे बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में जो प्रस्ताव दिया, वह अगर फाइनल हो गया तो बिहार की सरकारी नौकरियों में अनारक्षित वर्ग के लिए मात्र 25 प्रतिशत सीटें बचेंगी। सरकारी नौकरियों के बाद सरकार बाकी चीजों में भी यह आरक्षण रोस्टर लागू करेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि जाति गणना की रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार निर्णय लेगी। अनुसूचित जाति और जनजातियों की संख्या में वृद्धि के कारण इन्हें मिलने वाले आरक्षण को बढ़ाना पड़ेगा। सरकारी सेवाओं में इनके आरक्षण के अनुपात को तो बढ़ाना ही होगा। पिछड़े वर्ग और अति पिछड़ों के लिए भी आरक्षण बढ़ना चाहिए। जो 50 प्रतिशत आरक्षण है, उसे हम 65 प्रतिशत कर दें। पहले से अगड़ी जातियों को 10 प्रतिशत है तो इस 65 प्रतिशत के बाद कुल आरक्षण 75 प्रतिशत हो जाएगा। तब अनारक्षित 25 प्रतिशत बचेगा।
देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, लेकिन असली चुनावी मोड बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान में राज्य की नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार है। जातीय जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री ने आरक्षण बढ़ाने के साथ-साथ सभी गरीबों को आर्थिक मदद का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री के प्रस्ताव के साथ ही विधानसभा की कार्यवाही समाप्ति की घोषणा कर दी गई। बुधवार को कार्यवाही शुरू होने के साथ ही यह बात आगे बढ़ेगी और सरकार इसी सत्र के बाकी तीन दिनों के अंदर सारे प्रस्तावों को अधिसूचना के रूप में जारी कर सकती है।