राज्यसभा में भी पास हुआ नागरिकता संशोधन बिल
नागरिकता संशोधन बिल को लेकर भारी हंगामा और शोर मचा. उसके बाद लोकसभा में इस बिल के पास होने के बाद यही उम्मीद जताई जा रही थी कि राज्य सभा में भी यह बिल पास हो जाएगा और वैसा ही हुआ भी. गौरतलब है कि राज्यसभा में भी बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पासा हो गया. लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका है. राज्यसभा में बिल के पक्ष में 125 वोट, वहीं विपक्ष में 105 वोट पड़े. विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के प्रस्ताव को भी सदन ने नामंजूर कर दिया था. शिवसेना ने विधेयक पर वोटिंग से किनारा किया. जबकि, जनता दल (यूनाइटेड) ने विधेयक का समर्थन किया. विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध तरीके से रह रहे अप्रवासियों के लिए कोई प्रमाण पत्र न होने के बावजूद नागरिकता हासिल करना आसान हो जाएगा. इसके लिए पात्र होने की समय सीमा 31 दिसंबर 2014 होगी. लोकसभा में यह विधेयक सोमवार को पारित हुआ था. गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष से विधेयक का समर्थन करते की अपील करते हुए कहा था कि वे समाज को बांटने के लिए राजनीति न करें. शाह ने बताया था कि 44 सदस्यों ने सदन में अपनी राय, सुझाव व आपत्तियां पेश की हैं. अमित शाह ने कहा कि अगर देश का बंटवारा नहीं किया गया होता तो नागरिकता अधिनियम में संशोधन की जरूरत नहीं होती. अगर पिछली सरकार ने काम किया होता तो हम विधेयक नहीं लाते. उन्होंने कहा कि कब तक हम देश की समस्या को टालते रहेंगे. लियाकत-नेहरू समझौता 1950 में हुआ था. इसमें दोनों देशों ने अल्पसंख्यकों के साथ सम्मान का व्यवहार करने और अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करने पर सहमति बनी थी. लेकिन वादा तोड़ दिया गया.