सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर हुई सुनवाई, एससी ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़े मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बाग की पीठ के समक्ष यह सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल में एसआईआर के खिलाफ दायर एक याचिका पर चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने आयोग को इस संबंध में एक अलग स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि चूंकि केरल में स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं, इसलिए आयोग की ओर से पक्षों को सुने बिना एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग को एक दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी। पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई है। इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी। राज्य की ओर से पेश हुए वकील कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के अत्यधिक तनाव के कारण अब तक 23 बीएलओ की मौत हो चुकी है।
तमिलनाडु में एसआईआर से जुड़े मामलों की सुनवाई 4 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की सहमति के बिना तीनों राज्यों के मामलों में कोई स्थगन आदेश जारी नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह मामला पहले मद्रास हाईकोर्ट गया था, जहां राज्य चुनाव आयोग ने कहा था कि उसे एसआईआर प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि 99 फीसदी मतदाताओं को फॉर्म दिए जा चुके हैं और 50 फीसदी से ज्यादा डेटा का डिजिटलीकरण नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल लोगों में अनावश्यक डर पैदा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में जल्दबाजी की जा रही है और बीएलओ पर काफी दबाव है। उन्होंने दावा किया कि असम में लागू की गई फॉर्म प्रक्रिया को पूरे देश में लागू करने की कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट अब अगली सुनवाई में सभी राज्यों और चुनाव आयोग के जवाब के बाद आगे का रास्ता तय करेगा।