पति के खिलाफ घर के बाहर धरने पर बैठी पत्नी
संवाददाता/in24 न्यूज़.
पति पत्नी का रिश्ता विश्वास पर ज्यादा मजबूती से टिकता है, मगर जब पति और पत्नी के बीच मतभेद हो तब सारी स्थितियां बिलकुल बदल जाती हैं। आंध्र प्रदेश के नरसन्नापेट में एक महिला अपने ही पति के घर के बाहर धरने पर बैठ गई है। दरअसल महिला का कहना है कि शादी के 14 साल बाद अब उसका पति उसे अकेला छोड़ रहा है। जबकि वो अपने पति के साथ रहना चाहती है। महिला की पहचान सुनीता के रूप में हुई है। उसका कहना है कि उसके ससुराल वाले यहां तक कि उसका पति भी उसका साथ नहीं दे रहा हैं। महिला नरसन्नापेट की रहने वाली है।पीड़िता के मुताबिक, उसकी शादी 2006 में नरसन्नापेटा के एक निजी ट्रैवल्स मैनेजर बोनीया रघुराम से हुई थी। महिला ने बताया कि शादी के दो साल तक तो सब ठीक ठाक रहा लेकिन आगे उसका पति उसे हर दिन दवाईयां पिलाकर प्रताड़ित करने लगा। महिला ने बताया कि उसका पति उसे मनोचिकत्सक के पास ले जाता था। यहां डॉक्टर जो उसे दवाइयां दे रहे थे उससे उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा था। इसके काफी दिनों यानी साल 2019 में उसके पति ने मुझे मायके विजयनगर भेज दिया और कहा कि उसे बच्चे नहीं होंगे। काफी महीने बीत जाने के बावजूद महिला को उसके ससुरालवाले तब से लाने नहीं आए। इसके बाद महिला ने अपने ससुर से भी मामले को सुलझाने की बात कही लेकिन वे लोग उसकी एक भी बात नहीं सुने। जब उसे किसी से मदद नही मिली तो उसने कोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें वो न्याय की गुहार लगा रही है। कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद महिला खुद ही अपने पति के घर पहुंच गई। इसके बाद जब वह अपने पति के पास पहुंची तो वह घर में ताला लगाकर कही चला गया। सुनीता का कहना था कि अब चाहे जो हो जाय लेकिन वो यहां तभी उठेगी जब उसे न्याय मिलेगा। किसी तरह सुनीता के धरने देने की जानकारी पुलिस के पास पहुंची। मामला सामने आते ही पुलिस सुनीता के घर पहुंची तो उसने पुलिस को सारे मामले अवगत कराया। महिला ने पुलिस से रोते हुए कहा कि उसके मां-बाप बूढ़े हो चुके हैं और अब वो उन पर बोझ नहीं बनना चाहती। शादी के 14 साल बीत जाने के बाद उसका पति उसे घर से बाहर निकाल रहा है। मैं उन बूढ़े लोगों पर कब तक बोझ बनूंगी। पुलिस को दिये बयान में महिला ने बताया है कि उसने श्रीकाकुलम अदालत में याचिका दायर की है। वहीं महिला की मांग सुनने के बाद पुलिस का कहना है कि इस मामले को यहां नहीं सुलझाया जा सकता क्योंकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और ऐसे में उनका धरना देना ठीक नहीं है। अब सवाल है कि आख़िर महिला द्वारा इस प्रकार धरना देना कितना सही है!