निजता मौलिक अधिकार - सुप्रीम कोर्ट

 24 Aug 2017  1136

ब्यूरो रिपोर्ट / in24 न्यूज़

देश की सर्वोच्च न्यायपालिका ने निजता यानि राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकार करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ के मुताबिक निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है। संविधान पीठ ने इस संबंध में एमपी सिंह और खडग सिंह मामले में शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले को भी पलट दिया। आपको बता दें कि इन दोनों मामलों में शीर्ष अदालत ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकारों की श्रेणी से बाहर रखा था। संविधान पीठ आधार मामले में निजता के अधिकारों के संबंध में सुनवायी कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि पीठ पर सीनियर से सीनियर जज हैं।

न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि यह फैसले उनके द्वारा नहीं लिखा गया, लेकिन इसमें सबकी सर्वसम्मति थी। उन्होंने यह भी कहा कि छह और आठ सदस्यीय बेंच के पिछले दो फैसलों को रद्द किया जा रहा है। राइट टू प्राइवेसी जीवन के अधिकार के लिए जरूरी है और अब अनुच्छेद 21, भाग 3 का हिस्सा है। जस्टिस खेहर ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 21, जिसमें अब राइट टू प्राइवेसी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। ये कहता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार, कोई व्यक्ति अपने जीवन या निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं होगा। पीठ के सभी जजों के निर्णयों के आधार पर सीजीआई खेहर ने कहा कि राइट टू प्राइवेसी मौलिक अधिकार है।

सर्वोच्च न्यायपालिका के फैसले पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये आधार कार्ड को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विवाह, लिंग, परिवार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां अब आप देने के लिए बाध्य नहीं हैं। निजी विवरण जैसे कि क्रेडिट कार्ड, सोशल नेटवर्क प्लेटफार्मों, आईटी संबंधित जानकारियां भी अब हर जगह शेयर करने को बाध्य नहीं हैं। कोर्ट के फैसले के बाद आपकी सभी जानकारियां अब संरक्षित हैं। इतना ही नहीं सभी सार्वजनिक जानकारियां, जहां आपकी गोपनीयता सुरक्षा के लिए न्यूनतम नियमों की आवश्यकता होती है, वो भी संरक्षित हैं।

अब, राइट टू प्राइवेसी संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 से जुड़ गया गया है। भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों को छह भागों में बांटा गया है। संविधान जब लागू हुआ था तो संविधान में सात प्रकार के मौलिक अधिकार एक नागरिक को मिले थे लेकिन संविधान के 44वें संशोधन में संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी अधिकार के रूप में बदल दिया गया था। अब के समय में भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों में छह अधिकार हैं, जिन्हें अनुच्छेद 12 से लेकर 35 के बीच रखा गया है। अब आपको बताते हैं कि भारतीय संविधान में किन-किन चीजों का समावेश किया गया है जो मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आते हैं।

1 - समानता का अधिकार (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 18)

2 - शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 से अनुच्छेद 24)

3 - स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22) 4 - धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28) 5 - शिक्षा और संस्कृति का अधिकार (अनुच्छेद 29 से अनुच्छेद 30) 6 - संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)

बहरहाल निजता मामले वाली याचिका पर सर्वोच्च न्यायपालिका का फैसला आते ही याचिका का विरोध करने वाली केंद्र सरकार की चारो तरफ आलोचना भी हो रही है। ट्विटर और फेसबुक पर इस मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा कर खिंचाई की जा रही है।