इस्लाम के खिलाफ लिखने से पाकिस्तान में होगी जेल

 27 Jul 2020  25

संवाददाता/in24 न्यूज़.
अगर पकिस्तान में किसी ने इस्लाम के खिउलाफ लिखने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं. उसे जेल की सज़ा सुनाई जाएगी. गौरतलब है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में इस्लाम की रक्षा के नाम पर एक ऐसा विधेयक पारित किया गया है जिसके तहत कानून बनने के बाद इस्लाम के खिलाफ कुछ भी प्रकाशित करने या इस्लाम के प्रति घृणा फैलाने वालों को जेल की सजा हो सकती है। इस विधेयक को तहफ्फुज-ए-इस्लाम 2020 का नाम दिया गया है। इसको पेश करने वालों की दलील थी कि यदि यह विधेयक पास नहीं हुआ तो इस्लाम खतरे में आ जाएगा। इस विधेयक को लेकर पाकिस्तान में एक धड़े में काफी बेचैनी है। उनका कहना है कि ऐसे कानून से पाकिस्तान में उन्मादी मजहबियों का बोलबाला हो जाएगा। यह विधेयक 22 जुलाई को पारित किया गया। जिसके अनुसार इस्लाम के किसी भी पैंगंबर की पवित्रता कम की गई, चारों आसमानी किताबों के बारे में कुछ टिप्पणी की गई, पैगम्बर मुहम्मद और उनके परिवार की शान के खिलाफ कुछ कहा गया लिखा गया, इस्लाम के अलावा किसी और मज़हब या सेक्ट को बढ़ावा दिया गया तो पांच साल की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यही नहीं इस विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि जब भी हजरत मोहम्मद का कहीं नाम लिखा जाएगा तो उसके पहले खत्म-उन-नबीयीन। यानी शांति के मसीहा लिखना अनिवार्य होगा। पाकिस्तान के साइंस एंड टेक्नोलाॅजी मंत्री फव्वाद चौधरी ने इस विधेयक की खिलाफत की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे निजी विधेयक सदन से पारित होते रहे तो अतिवाद की एक परिपाटी विकसित हो जाएगी, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान होगा। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा कि पार्लियामेंट में, खासकर पंजाब में एक ऐसा वातावरण बन गया है, जहां हर दिन कोई मेम्बर एक बिल लेकर आता है और कहता है कि इसे पास नहीं किया तो इस्लाम खतरे में पड़ जाएगा। फव्वाद चौधरी ने यह चेतावनी दी कि इससे पाकिस्तान कई जमातों में बंट जाएगा और यहां मज़हबी कट्टरता बढ़ती जाएगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इस्लाम को ना तो टिकटाॅक से खतरा है और ना किसी किताब से, बल्कि खतरा मज़हबी उन्मादियों से है। पाकिस्तान के नेशनल पार्टी के अध्यक्ष अयूब मलिक ने कहा है कि यह विधेयक पाकिस्तान को विभिन्न जमातों में बांटने का कारण बन जाएगा और यहां रह रहे अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा का बीज बोएगा। पहले से ही पाकिस्तान में तमाम समस्याएं झेल रहे अल्पसंख्यक हाशिये पर धकेल दिए जाएंगे। मलिक ने कहा कि पाकिस्तान पहले ही सैन्य शासक जनरल जिया उल हक की गलत नीतियों का परिणाम भुगत चुका है। राजनीति में कट्टरपंथियों का महत्व बढ़ने से कायदे आजम जिन्ना के सपनों का पाकिस्तान विकसित नहीं हो सका। अब तहफ्फुज-ए-इस्लाम विधेयक के पास होने के बाद जिन्ना का पाकिस्तान पूरी तरह से विखंडित होने की कगार पर आ चुका है। महिलाओं के बीच काम कर रहे दि वूमेन डेमोक्रेटिक फ्रंट ने कहा है कि यह विधेयक एक तरह से सरकार द्वारा मज़हबी मामले में सेंसरशिप लागू करने जैसा है। इस विधेयक का मकसद पाकिस्तान में स्वतंत्र सोच रखने वाले बुद्धिजीवियों और विचारकों में एक तरह से डर पैदा करना है कि उन्होंने कुछ भी स्वतंत्र रूप से लिखा तो उनकी किताबें, मैगज़ीन और हैंड बिल पर बैन लगाकर उन्हें मज़हब के नाम पर जेल भेज दिया जाएगा। पाकिस्तान एक तरफ पहले से ही  परेशानियों का सामना कर रहा है, ऐसे में इस तरह के कानून से यह साफ़ है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी भी अब खतरे में आ गई है.