रूस के बाद अचानक ईरान पहुंचे राजनाथ सिंह

 06 Sep 2020  33

संवाददाता/in24 न्यूज़.
भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच रूस का दौरा खत्म कर लौट रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान पहुंच गए हैं. उनका ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पूर्वोत्तर में चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों इससे करारा झटका लगेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि मैं ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल आमिर हतामी से मुलाकात करूंगा. इससे पहले रूस के दौरे पर पहुंचे रक्षा मंत्री ने मध्य एशियाई देशों उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान को भी साधने की कोशिश की.एलएसी पर जारी तनाव पर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक कवायद का अभी तक बहुत असर नहीं हुआ है. अब सबकी निगाहें एससीओ में जयशंकर और वांग यी की प्रस्तावित यात्रा पर टिकी हुई हैं. सूत्रों के मुताबिक, शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने रूस की राजधानी मॉस्को गए राजनाथ सिंह को शनिवार को ही भारत के लिए रवाना होना था, लेकिन उन्होंने तीनों देशों के समकक्षों से मिलने के लिए अपनी यात्रा को आगे बढ़ा दिया. राजनाथ सिंह इसके बाद भारत वापस लौटने की बजाय मॉस्को से सीधे तेहरान पहुंच गए और अब ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अमीर हातमी से मुलाकात करेंगे. साथ ही वहां रात्रि प्रवास भी करेंगे. बता दें कि अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत और ईरान के बीच रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा है. मोदी सरकार 2014 से लगातार ईरान को अहम सहयोगी मानती रही है. इससे एक दिन पहले ही उन्होंने फारस की खाड़ी के देशों से अपने मतभेदों को परस्पर सम्मान के आधार पर बातचीत से सुलझाने का अनुरोध किया था. एससीओ की बैठक से इतर राजनाथ ने मध्य एशियाई देशों उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा समझौतों पर चर्चा की और इन देशों के साथ मजबूत व्यापारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों की वकालत की. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्री मेजर जनरल कुरबानोव बखोदीर नीजमोविच के साथ मॉस्को में शानदार बैठक हुई. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि कजाकिस्तान के रक्षामंत्री लेफ्टिनेंट जनरल नुरलान येरमेकबायेव के साथ सार्थक बातचीत हुई. हमने भारत-कजाकिस्तान रक्षा सहयोग को और गति देने के तरीकों पर चर्चा की. जाहिर है इस मुलाकात से चीन और पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ गई है.