जर्मनी के डॉक्टर उलरिच ने कहा - बेमिसाल है साइंटिस्ट मुनीर खान के इलाज का तरीका

 17 Dec 2020  3698

ब्यूरो रिपोर्ट/in24 न्यूज़/मुंबई 

   जर्मनी के मशहूर डॉक्टर उलरिच रेंडॉल ने बॉडी रिवाइवल के प्रणेता साइंटिस्ट मुनीर खान के इलाज के तरीकों को क्लीन चिट दे दी है. डॉक्टर उलरिच जर्मनी के म्यूनिख शहर में बतौर डॉक्टर हैं और दो साल पहले, उन्हें उनके दोस्तों ने साइंटिस्ट मुनीर खान के इलाज और उनकी दवाओं के बारे में बताया था. लाइलाज बीमारियों को ठीक करने वाले साइंटिस्ट खान के बारे में सुनी कहानियों ने उन्हें इंटरनेट पर उनके बारे में जानने को प्रेरित किया और फिर पिछले साल उन्होंने भारत की यात्रा की. आपको बता दें कि अपने इलाज के तरीकों और दवाओं के लिए साइंटिस्ट मुनीर खान विवादों में रहे हैं. जानकारों का मानना है कि उनकी क्लीनिक पर रोगियों की बढ़ती भीड़ देख कर मुंबई के डॉक्टरों की ताक़तवर लॉबी ने उनके खिलाफ ‘चमत्कारी दवा’ बेचने के आरोप लगाए और उनके खिलाफ पुलिस केस करवा दिया था. नतीजतन साइंटिस्ट खान को कुछ दिन जेल में बिताने पड़े। लेकिन जेल से वापस लौट कर धुन के पक्के बॉडी रिवाइवल के प्रणेता ने फिर से अपना काम शुरू कर दिया. साइंटिस्ट मुनीर खान का इलाज का तरीका विशुद्ध तौर पर आयुर्वेद पर आधारित है और उनका दावा है कि वे कैंसर के उन मरीज़ों को भी ठीक कर चुके हैं, जिन्हें मुंबई के बड़े-बड़े डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था. जर्मन डॉक्टर उलरिच रेंडॉल मुंबई स्थित क्लीनिक में उनसे मिले और कुछ दिन उन्होंने साइंटिस्ट खान के इलाज का तरीका देखा, उसे समझने की कोशिश की. उनके मुताबिक- “मुझे लगा कि उनसे मिलना चाहिए क्योंकि वे सेल यानी कोशिकाओं के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं. वे बीमारी के लक्षणों की अलग-अलग डायगनोसिस पर नहीं जाते, बल्कि बीमारी की असली जड़ तक पहुंच कर उसे ठीक करने की कोशिश करते हैं. इसका मतलब यह है कि वे मूल रूप से शरीर के मेटाबोलिज़्म को इलाज का आधार बनाते हैं. मतलब मेटाबोलिज़्म के ज़रिये वे शरीर की सफाई पर अपना इलाज केंद्रित करते हैं।”

         डॉक्टर उलरिच ने दरअसल साइंटिस्ट खान के इलाज पर यूं ही भरोसा नहीं कर लिया. कई दिन साइंटिस्ट मुनीर खान की क्लीनिक में बिताने के बाद वापस जर्मनी लौटते हुए वे साइंटिस्ट मुनीर खान की दवाएं अपने साथ लेते गए. जर्मनी जा कर डॉक्टर उलरिच ने उन दवाओं का प्रयोग खुद पर किया और उसके नतीजों से हैरान रह गए. जर्मनी के डॉक्टर उलरिच का कहना है कि, “मैं दरअसल इलाज के उनके तरीकों का परीक्षण भी करना चाहता था, ये देखने के लिए कि उन पर यकीन किया जा सकता है या नहीं, इसी उद्देश्य से मैं साल भर पहले भी यहां आया था और वापस जाते वक्त उनकी कुछ दवाएं भी अपने साथ जर्मनी ले गया था और उनका मैंने वहां परीक्षण भी किया. इन दवाओं में शहद का स्वाद है, जो बहुत सामान्य सी बात है. मैंने दवाई की खुराक हर दूसरे दिन लेनी शुरू की. कुछ ही दिन बाद मैंने एहसास किया कि मेरी यूरीन पहले से बहुत गाढ़ी हो गई है. मतलब साफ था कि ये दवाएं लेने के बाद मेरे शरीर में रक्त संचार के सिस्टम में कुछ बदलाव आया है. पहले तो मैं बहुत घबरा गया क्योंकि मैंने अपने पूरे जीवन में इस तरह की, कोई दवा नहीं ली थी लेकिन दवा लेना मैंने जारी रखा और जल्दी ही मैं महसूस करने लगा कि मेरा शरीर पहले से हल्का हो गया है और मैं पहले से बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं. अब तो मैं इस दिशा में सोच रहा हूं कि कैसे इलाज के इस नायाब तरीके को दुनिया भर में फैलाया जाए और लोगों को उनके लाइलाज रोगों से मुक्ति दिलाई जाए. जो चीज़ मानवता के लिए अच्छी है, उसे पूरी दुनिया में फैलाना चाहिए.”

          उधर, मुंबई में साइंटिस्ट मुनीर खान ने इस खबर से संतोष जताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा लोगों की बेहतरी के लिए काम किया है और प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ का प्रारूप सदैव उनका लक्ष्य रहा है. साइंटिस्ट खान मानते हैं कि आयुर्वेद इसी धरती की विद्या है और भारत के लोगों को इसे दुनिया भर में फैलाने का काम करना चाहिए.  साइंटिस्ट खान मानते हैं कि वे प्रधानमंत्री की ‘स्किल इंडिया’ योजना के बहुत बड़े मुरीद हैं और दावा करते हैं कि इस योजना के तहत दवाएं बनाने और उसके प्रचार-प्रसार में लोगों को रोज़गार तो मिलेगा ही, वे ‘सक्षम’ भी बन पाएंगे. हुनरमंद बन कर वे देश की तरक्की में बढ़ोत्तरी कर सकेंगे. साइंटिस्ट मुनीर खान का कहना है कि वे बीमार ठीक करते हैं उनका बीमारी से कोई लेना-देना नहीं है. सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि बॉडी रिवाइवल का कोई साइड इफेक्ट नहीं है और उससे भी बड़ी बात यह है कि पहले तीन खुराक से यदि मरीज को आराम नहीं आता तो साइंटिस्ट मुनीर खान द्वारा औषधि वापस ले ली जाती है और मरीज को तत्काल उसका पैसा वापस कर दिया जाता है लेकिन ऐसा बहुत कम ही होता है कि मरीज द्वारा औषधि वापस की गयी हो. औषधि वापस तब आती है जब मरीज के परिजन उसे किसी डॉक्टर को दिखाते हैं या फिर दवाई पहुँचने से पहले ही मरीज दम तोड़ दे क्योंकि साइंटिस्ट मुनीर खान के पास ज्यादातर वही मरीज आते हैं जिनका इलाज करने से डॉक्टर मना कर देते हैं या फिर मरीज अपने जीवन के अंतिम स्टेज पर होता है. जिन लोगों को साइंटिस्ट मुनीर खान की बॉडी रिवाइवल ने नई जिंदगी दी है वे लोग और उनका परिवार साइंटिस्ट को भगवान और मसीहा मानता है.